मनमोहन के कार्यकाल में सेंसेक्‍स देता था धमाकेदार रिटर्न, मोदी सरकार में घटी स्‍टॉक इनवेस्‍टर्स की कमाई

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2004 से 2009 के बीच यूपीए-1 यानी मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सेंसेक्‍स ने 22.9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 180 प्रतिशत का रिटर्न दिया। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में हर साल 12.22 प्रतिशत की दर से 77.98 प्रतिशत का रिटर्न मिला।

मई 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सत्‍ता में आने के बाद सेंसेक्‍स ने हर साल 9.37 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हालांकि पिछली सरकारों के मुकाबले रिटर्न्‍स की दर कम है। मई में जब मोदी सरकार बनी थी, तब से पिछले शुक्रवार (5 अप्रैल) तक सेंसेक्‍स में 56 प्रतिशत का रिटर्न मिला है जबकि निफ्टी 9.52 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से करीब 58 फीसदी बढ़ा है। हालांकि मिड और स्‍मॉल कैप के शेयरों में 2005-07 के बाद का सबसे अच्‍छा समय देखा गया। मोदी सरकार बनने के बाद, मिड-कैप इंडेक्‍स 12.68 प्रतिशत की दर से प्रत प्रति वर्ष बढ़ा जबकि स्‍मॉल कैप के शेयर हर साल 10.85 फीसदी की दर से उछले।

 

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व वाली एनडीए सरकार के बाद मोदी सरकार में स्‍टॉक मार्केट्स ने सबसे कम रिटर्न्‍स दिए हैं। पिछले दो दशकों की इक्विटी परफॉर्मेंस का इकॉनमिक टाइम्‍स का एक अध्‍ययन बतलाता है कि 2004 से 2009 के बीच यूपीए-1 यानी मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सेंसेक्‍स का सबसे अच्‍छा दौर था। इस दौरान सेंसेक्‍स में 22.9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 180 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इसकी वजह विदेशी संस्‍थागत निवेश के साथ-साथ रिकॉर्ड आर्थिक और कॉर्पोरेट कमाई रही। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में सेंसेक्‍स ने हर साल 12.22 प्रतिशत की दर से 77.98 प्रतिशत का रिटर्न दिया।

1 सितंबर, 2013 से 30 मई, 2014 के बीच निफ्टी में 32 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। मार्केट में रिकरवरी रघुराम राजन को भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाए जाने तथा मोदी के अगला प्रधानमंत्री चुने जाने की प्रबल संभावनाओं के चलते शुरू हुई। ईटी ने फंड मैनेजर्स के हवाले से कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में स्‍टॉफ परफॉर्मेंस का आंकलन करते समय आर्थिक वास्‍तविकताओं का ध्‍यान भी रखना होगा।

कोटक म्‍युचुअल फंड्स के एमडी नीलेश शाह ने अखबार से कहा, “पिछले पांच साल में अर्थव्‍यवस्‍था वैसी रही है जैसे किसी घर की मरम्‍मत हो रही हो। हमारे बैंकिंग सिस्‍टम की रिपेयरिंग हो गई है, मुद्रास्‍फीति पर नियंत्रण हुआ है, टैक्‍स कंप्‍लायंस अच्‍छा हुआ है। इन सभी कदमों से शुरू में तकलीफ होगी पर लंबे समय में यह फायदा करेंगे।”

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