लोकसभा चुनाव में की गई रिश्वत की मिलावट,कांग्रेस के बड़े नेता आये रेडार पर!

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 इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के दस्तावेज इस ओर इशारा करते हैं कि हाल ही में खत्म हुए चुनाव के दौरान 11 कांग्रेस प्रत्याशियों को कथित तौर पर मोटी रकम ट्रांसफर की गई। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी को भी 20 करोड़ रुपये की रकम का भुगतान हुआ। इनकम टैक्स विभाग द्वारा इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स और लिए गए बयान इलेक्शन कमिशन के पास भेजे गए हैं, जिन्हें अब सीबीआई को फॉरवर्ड कर दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस ने भी इन दस्तावेज को देखा है।

बता दें कि 7 अप्रैल 2019 को जिन लोगों के यहां छापे मारे गए, उनमें मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ से जुड़े 5 लोग भी शामिल थे। कहा जा रहा है कि आईटी विभाग के जांचकर्ताओं ने लोगों के बयानों और खातों की जानकारी का मिलान किया। वॉट्सऐप चैट के जरिए पैसों के लेनदेन का भी पता लगाया। इसके अलावा, फोन पर हुई बातचीत भी रिकॉर्ड की। चुनाव आयोग के पास फोन पर हुई बातचीत के ट्रांसस्क्रिप्ट फिलहाल दाखिल नहीं किए गए हैं। आरोप है कि पैसे को ‘विभिन्न प्रत्याशियों के इस्तेमाल के लिए’ डायवर्ट किया गया। चुनाव आयोग से 4 मई को लिखित में यह भी सिफारिश की गई है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जाए।

जांचकर्ताओं के रिकॉर्ड बताते हैं कि मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और 2019 में भोपाल से चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह उन प्रत्याशियों की सूची में टॉप पर हैं, जिन्हें तलाशी अभियान की जद में आए लोगों से चुनाव के लिए फंड मिले। आईटी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, ये डिटेल्स एक ललित कुमार चलानी नाम के शख्स के कम्प्यूटर से मिली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चलानी एक अकाउंटेंट हैं जो मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ के पूर्व सहयोगी आरके मिगलानी और प्रवीण कक्कड़ के साथ काम कर चुके हैं।

आईटी विभाग के दस्तावेज के मुताबिक, लोकसभा प्रत्याशियों को चलानी के जरिए कथित तौर पर 25 से 50 लाख रुपये के बीच की रकम मिली। वहीं, दिग्विजय सिंह को 90 लाख रुपये मिले। आईटी विभाग के मुताबिक, इन भुगतान से जुड़ी रसीदें सिर्फ दो प्रत्याशियों के मामले में मिले। एक सतना से राजाराम प्रजापति जबकि दूसरे बालाघाट से मधु भगत। चुनाव आयोग की राय है कि लोकसभा प्रत्याशियों द्वारा चुनाव में खर्च रकम का लेखाजोखा जून के आखिर तक आएगा, इसलिए तभी कोई ऐक्शन लिया जा सकता है।

जिन अन्य लोकसभा प्रत्याशियों पर फंड मिलने का आरोप है, वे हैं- मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, मंडला से कमल माडवी, शहडोल से प्रमिला सिंह, सिद्धि से अजय सिंह राहुल, भिंड से देवाशीष जरारिया, होशंगाबाद से शैलेंद्र सिंह दीवान, खजुराहो से कविता सिंह नटिराजा और दामोह से प्रताप सिंह लोधी। विधानसभा चुनावों में पेंडिंग के मामले में आईटी विभाग का निष्कर्ष है कि इस समूह द्वारा कुल 17.9 करोड़ रुपये 87 प्रत्याशियों को दिए गए और उनमें से 40 को विधानसभा चुनाव में जीत मिली।

चुनाव आयोग के मुताबिक, इन प्रत्याशियों द्वारा असेंबली चुनाव में किए गए खर्च के ब्योरे में इनको दी गई रकम की जानकारी नहीं दी गई है। कई मामलों में तो यह अधिकतम खर्च की सीमा 28 लाख रुपये से ज्यादा है। आईटी विभाग के इस निष्कर्ष पर सीएम कमलनाथ ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उनका इससे कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने यह मामला सीबीआई को भेजने दीजिए। यह मायने नहीं रखता। इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। वह जो कहना चाहें, कह सकते हैं। जिस एक शख्स हिमांशु शर्मा के यहां भी छापा मारा गया, वह टीवी पर आकर यह कह चुका है कि वह बीजेपी के लिए काम करता है।’

आईटी विभाग के निष्कर्षों में यह भी आरोप है कि मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों से बहुत बड़े पैमाने पर पैसा जुटाया गया। इस बारे में विस्तृत जानकारी कमलनाथ के पूर्व ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के फोन के वॉट्सऐप संदेशों से मिले हैं। इसके मुताबिक, ट्रांसपोर्ट विभाग के नाम 54.45 करोड़, एक्साइज डिपार्टमेंट के नाम 36.62 करोड़, माइनिंग डिपार्टमेंट के नाम 5.50 करोड़, पीडब्ल्यूडी विभाग के नाम 5.20 करोड़ और सिंचाई विभाग के नाम 4 करोड़ रुपये दर्ज हैं। ललित कुमार चलानी के फोन्स से मिले बाकी सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि 17 करोड़ रुपये कथित तौर पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी को ट्रांसफर किए गए। इस पैसे का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव में होना था।

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