दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए नरेंद्र मोदी हुए तैयार,यहां पढ़िए शपथ ग्रहण से जुड़ी सारी जरुरी बातें!

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 बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार की शाम को राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में आयोजित समारोह में शपथ ग्रहण करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनकी दूसरी पारी होगी। साथ में उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी भी शपथ लेंगे। मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले नामों को लेकर नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच बुधवार को दो दौर की बातचीत हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय सूत्रों के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से छह घंटा पहले उन लोगों को औपचारिक तौर पर सूचित किया जाएगा, जिन्हें मंत्री बनाया जा रहा है।

शपथ समारोह में करीब सात हजार मेहमान शिरकत करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, मेहमानों की सूची में बिम्सटेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति, मॉरीशस के प्रधानमंत्री, विभिन्न देशों के भारत स्थित राजनयिकों, मुख्यमंत्रियों, शिक्षाविदों, लेखकों, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों व अन्य मशहूर हस्तियों को शामिल किया गया है। शपथ ग्रहण के बाद सभी अतिथियों के लिए जलपान (हाई-टी) का इंतजाम किया गया है। वहीं 40 विदेशी मेहमानों को राष्ट्रपति की ओर से छोटा भोज दिया जाएगा। मेहमानों के लिए रात्रिभोज में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन होंगे। विशेष मेहमानों के लिए सूप, पालक की सब्जी, चिकन के साथ ही ‘दाल रायसीना’ भी होगी जिसे बनाने में करीब 48 घंटे का वक्त लगता है।

विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैथिरीपाला सिरिसेना, किर्गिज राष्ट्रपति सोरांबने जेनेबकोव, म्यांमा के राष्ट्रपति यू विन मिंत, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जुगनाथ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, भूटान के प्रमं लोटे त्सेरिंग, थाईलैंड के कृषि व सहकारिता मंत्री ग्रिसडा बूनराचौरा समेत कई अन्य ने आने की स्वीकृति भेजी है। प्रधानमंत्री पद का शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी पहली द्विपक्षीय मुलाकात किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सोरांबने जेनेबकोव से करेंगे। राष्ट्रपति सोरांबने जेनेबकोव गुरुवार रात को ही स्वदेश लौट जाएंगे। प्रधानमंत्री अन्य मेहमान नेताओं से मुलाकात 31 मई को हैदराबाद हाउस में करेंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद समारोह में पहुंचेंगे। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समारोह में शामिल होने की स्वीकृति भेजी है। हालांकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने बुधवार को ऐलान किया कि वह शपथ ग्रहण समारोह में नहीं शामिल होंगी। जानी-मानी जिन हस्तियों को न्योता भेजा गया है, उनमें फिल्म स्टार शाहरुख खान और रजनीकांत, पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल शामिल हैं। आमंत्रण पाने वालों में उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, अजय पिरामल और रतन टाटा, खिलाड़ियों में पूर्व धावक पीटी ऊषा, क्रिकेटर राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ, हरभजन सिंह, बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल, उनके कोच पुलेला गोपीचंद और जिम्नास्ट दीपा करमाकर, फिल्मी सितारों में कंगना रनौत, संजय लीला भंसाली, करण जौहर को निमंत्रण भेजा गया है। जॉन चैम्बर्स, बिल गेट्स और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की प्रबंध निदेशक व चेयरमैन क्रिस्टीन लेगार्ड को भी न्योता भेजा गया है।

यह चौथी बार है कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल का शपथ राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रेस सचिव अशोक मलिक के मुताबिक, इस पवित्र अवसर पर सादगी और गरिमा पर जोर दिया जाता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने कहा है कि यह एक दिखावटी समारोह न बने। राष्ट्रपति भवन में अब तक इतनी बड़ी भीड़ की मेजबानी नहीं की गई है।

यह दूसरा मौका है जब प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में शपथ लेंगे। मोदी ने पहली बार 26 मई, 2014 को देश के प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली थी। उस लोकसभा चुनाव में भाजपा पहली बार 282 सीटों के पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इस चुनाव में भाजपा ने अपना पिछला रिकार्ड सुधार कर 542 सीटों के लिए हुए चुनाव 303 सीटें जीती हैं। वहीं भाजपा की अगुआई वाली राजग को 353 सीटें मिली हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में राष्ट्रपति भवन के विशाल अहाते में शपथ ली थी। हालांकि 1990 में इस तरह खुले आकाश के नीचे शपथ लेने की परंपरा को शुरूकरने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर थे। भारत के ज्यादातर प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में ही शपथ ली है।

प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट सहयोगियों के नाम तय करने के लिए बुधवार को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीच दो दौर की बैठक हुई। मंगलवार को भी बैठक हुई थी। भाजपा के सहयोगी दलों को उनकी मांग के अनुरूप नहीं, बल्कि नेतृत्व के तय मापदंडों के मुताबिक ही जगह मिलेगी। जद (एकी) और शिवसेना को कुल चार मंत्री पद दिए जाने की संभावना है। इन पार्टियों से एक-एक कैबिनेट और एक-एक राज्यमंत्री होंगे। हालांकि, दोनों पार्टियों ने तीन-तीन या चार-चार पद मांगे हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी अन्नाद्रमुक को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। तीन मंत्री अकेले पश्चिम बंगाल से बनेंगे। भाजपा ने यहां पहली बार तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त देते हुए 18 सीट जीती हैं। तेलंगाना से भी एक मंत्री बनाया जा सकता है। यहां भाजपा के चार सांसद हैं। इसी तरह बिहार से रामविलास पासवान खुद मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे। पासवान की पार्टी ने छह सीटें जीती हैं। पंजाब कोटे से अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल कैबिनेट मंत्री होंगी। माना जा रहा है कि यूपी से दो महिलाएं और बाकी प्रदेशों से एक-एक महिला सांसद केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकती हैं। राजग के सभी सांसदों से कहा गया है कि वे 30 मई को दिल्ली में ही रहें। शपथ ग्रहण समारोह से छह घंटे पहले सांसदों को यह सूचना दी जाएगी कि उनका नाम मंत्रियों की सूची में शामिल है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। 50 से ज्यादा चेहरे मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने हैं। संभावना है कि मोदी अपने मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को ज्यादा मौका देंगे।

बंगाल के राजनीतिक हिंसा पीड़ित परिवार भी आएंगे
पश्चिम बंगाल में ‘राजनीतिक हिंसा’ में मारे गए लोगों के परिजनों को गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है। ऐसे परिवारों के 50 से अधिक लोग राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के मुताबिक, भाजपा ने बंगाल में राजनीतिक हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं को याद करने के लिए इन परिवारों को बुलाया है। आरोप है कि राजनीतिक हिंसा में भाजपा के कम से कम 80 कार्यकर्ता मारे गए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है। राजनीतिक हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों को ट्रेन से दिल्ली लाया जा रहा है। गुरुवार को इन लोगों को लाने के लिए पार्टी के नेता नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाएंगे। जिनके परिवारवालों को बुलाया गया है, उसमें से 46 की मौत पंचायत चुनाव के दौरान हुई थी। हालिया लोकसभा चुनाव में 5 अन्य मारे गए थे। ये परिवार बैरकपुर, कृष्णानगर नदिया, पुरुलिया, मालदा, बांकुड़ा, पश्चिमी मेदिनीपुर, झारग्राम, दक्षिण 24 परगना, बर्दवान, राणाघाट, बीरभूम और कूचबिहार से हैं।

समारोह में नहीं आएंगी ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 30 मई को नरेंद्र मोदी व उनके मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की रजामंदी देने के बाद बुधवार को समारोह में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। ममता ने ट्वीट में कहा कि मेरी योजना थी कि समारोह में जाऊंगी लेकिन मैं मीडिया रिपोर्ट देख रही हूं जिसमें भाजपा दावा कर रही है कि बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा में 54 व्यक्ति मारे गए। यह झूठ है। बंगाल में कोई राजनीतिक हत्या नहीं हुई है। ये हत्याएं आपसी रंजिश, पारिवारिक झगड़े व अन्य विवाद के कारण हुई हैं। ये राजनीति से जुड़े मामले नहीं हैं। हमारे पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है। इसलिए मुझे खेद है नरेंद्र मोदी जी कि मैं समारोह में शामिल नहीं हो पाऊंगी। ममता के इनकार पर प्रतिक्रिया जताते हुए भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सभी को मालूम है कि बंगाल में जो हिंसा हुई है, वह तृणमूल कांग्रेस के लोगों द्वारा राज्य सरकार के समर्थन से की जा रही है। यह पूछे जाने पर कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से इनकार किया है, विजयवर्गीय ने कहा कि वे नहीं आने का बहाना ढूंढ़ रही थीं और वह उनको मिल गया है। उन्होंने कहा कि बंगाल की पार्टी इकाई ने तय किया कि प्रदेश में चुनावी हिंसा में पीड़ित कार्यकर्ताओं से जुड़े लोगों को बुलाया जाए, भाजपा में ये लोग परिवार का हिस्सा हैं। अगर पार्टी अपने लोगों को बुलाती है, तब इसमें ममता को क्या आपत्ति हो सकती है?

पत्र लिख कर जेटली ने मंत्री बनने से किया इनकार, प्रधानमंत्री पहुंचे मिलने
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के शपथग्रहण से एक दिन पहले बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर नई सरकार में मंत्री बनने में असमर्थता जाहिर की है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से उनके सरकारी निवास पर जाकर मुलाकात की। अधिकारियों ने बताया कि मोदी रात आठ बजकर 50 मिनट पर वित्त मंत्री जेटली के घर पहुंचे और करीब 25 मिनट उनके पास रहे। मोदी ने जेटली के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनकी कुशल – क्षेम पूछी। इस मुलाकात से पहले लिखे अपने पत्र में जेटली ने नई सरकार में अपनी भूमिका को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही उहापोह को खत्म कर दिया। उन्होंने खराब स्वास्थ्य के कारण नई सरकार में मंत्री बनने से इनकार किया है। जेटली ने कहा कि हाल ही में संपन्न चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत मिलने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी अघोषित बीमारी के इलाज के लिए समय देने के बारे में प्रधानमंत्री को सूचित किया था। उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे औपचारिक रूप से यह निवेदन करने के लिए लिख रहा हूं कि मुझे अपने लिए, अपनी चिकित्सा के लिए और अपने स्वास्थ्य के लिए कुछ समय चाहिए और इस कारण मुझे अभी नई सरकार में कोई जिम्मेदारी न दी जाए।’ जेटली को पिछले सप्ताह जांच एवं इलाज के लिए एम्स में भर्ती होना पड़ा था। उन्हें चुनाव परिणाम की घोषणा वाले दिन गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हालांकि जेटली उस दिन शाम में भाजपा मुख्यालय में आयोजित जीत के जश्न समारोह में शामिल नहीं हो पाए थे।

जेटली ने पत्र में लिखा कि पिछले 18 महीनों में उन्होंने कुछ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा, ‘मेरे चिकित्सकों ने उनमें से अधिकांश चुनौतियों से मुझे सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। जब चुनाव प्रचार खत्म हो चुका था और आप केदारनाथ जा रहे थे, तो मैंने आप से जुबानी कहा था कि चुनाव प्रचार के दौरान मुझे जो जिम्मेदारियां दी गई थीं, मैं उन्हें पूरा करने में समर्थ रहा लेकिन भविष्य में कुछ समय के लिए मैं जिम्मेदारी से दूर रहना चाहूंगा। इससे मैं अपने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर ध्यान दे सकूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘आपके नेतृत्व वाली सरकार में पिछले पांच साल रह कर काम करना मेरे लिए बड़े गर्व की बात है और यह एक शिक्षाप्रद अनुभव रहा है। इससे पहले भी पार्टी ने मुझे पहली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में, पार्टी संगठन में और जब हम विपक्ष में थे तब भी मुझे विभिन्न दायित्व सौंपा। मैं अब इससे अधिक की अपेक्षा कर भी नहीं सकता था।’ जेटली 2009 से 2014 के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं।

जेटली मंत्रिमंडल में सबसे महत्वपूर्ण मंत्री रहे हैं। उन्होंने अक्सर सरकार के लिए मुख्य संकटमोचक का काम किया है। उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए संसद में जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को बढ़ाया। यह दो दशक से लंबित था। वह तीन तलाक जैसे मुद्दों पर आए कानूनों को आगे लाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका में रहे। रफाल सौदे का बचाव करने में भी वह बहुत मुखर रहे। जेटली खराब स्वास्थ्य के कारण इस बार चुनाव नहीं लड़े। 2014 में वह अपने पहले संसदीय चुनाव में अमृतसर से हार गए थे। वे कई साल तक पार्टी के प्रवक्ता रहे। वह पहली बार 47 वर्ष की उम्र में गुजरात से राज्यसभा पहुंचे। तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। जेटली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उन्होंने कुछ समय तक रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का भी काम संभाला।

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