प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी किसका करेंगे पार्टी में चुनाव!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव में 303 सीटें जीतवाकर बीजेपी की नैया पार लगा दी है. मोदी नाम की सुनामी का फायदा बीजेपी की सहयोगी पार्टियों को भी हुआ और बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए के खाते में इस चुनाव में 353 सीटें आ गईं. 2019 के चुनाव में पीएम मोदी पर जो वोटों की बरसात हुई, उसके पीछे कई योजनों के साथ साथ विदेश नीति, राष्ट्रवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों ने भी अहम भूमिका आद की. साल 2014 में पीएम मोदी ने इन मुद्दों से जुड़े मंत्रालयों में अपने सबसे मज़बूत नेताओं को ज़िम्मेदारियां सौंपी थीं. ऐसे में इस प्रचंड जीत के बाद एक बार फिर वही सवाल उठ रहे हैं कि इस बार इन मंत्रालयों में किनको मौका मिलेगा.

रक्षा मंत्रालय
साल 2014 के बाद से पीएम मोदी का देश की सुरक्षा पर बड़ा ज़ोर रहा है. आतंक पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति की बात करने वाली मोदी सरकार ने चुनाव से पहले पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक की और वहां कई आंतकियों को मौत के घाट उतारने का दावा किया. इसका सीधा फायदा पार्टी को चुनाव में मिला. मोदी ने भी अपने भाषणों में पुलवामा के शहीदों का ज़िक्र कर वोट मांगा. सेना को मज़बूत करने के लिए फ्रांस से रफाल विमानों का सौदा भी किया. अब सवाल उठता है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की कुर्सी इस बार किसके पास जाएगी. क्या एक दफा फिर पीएम मोदी उन पर भरोसा जताएंगे या फिर रक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी किसी और के कंधे पर डाली जाएगी.

गृह मंत्रालय

साल 2014 में सरकार बनने के बाद से देश की नंबर दो कुर्सी राजनाथ सिंह के पास है. उनके पहले कार्यकाल में घरेलू आतंकवाद, नक्सलियों के हमले और कश्मीर में हिंसा और आतंकी घटना जैसे मुद्दे सामने आए. अब सवाल है कि देश के सबसे बड़े मंत्रालयों में से एक गृह मंत्रालय इस बार किसको मिलेगा. क्या राजनाथ सिंह फिर से गृह मंत्री के पद संभालेंगे या फिर किसी और नेता को इस कुर्सी पर बिठाया जाएगा.

स्वास्थ्य मंत्रालय

केंद्र सरकार ने अपनी महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के नाम पर खूब वोट मांगा. इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों या 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपए तक का बीमा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया. ब्लूमबर्ग के वर्ल्ड हेल्थ इंडेक्स में भारत साल 2018 में 169 देशों की लिस्ट में 120वें पायदान पर था. दुनियाभर के कई हल्थ सर्वे में भारत स्वास्थ्य के मामले में काफी पीछे है. ऐसे में पीएम मोदी स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठा सकते हैं. इस लिहाज़ से देखना दिलस्प होगा कि साल 2014 में सरकार बनने के बाद से स्वास्थ्य मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभाल रहे जेपी नड्डा इस बार भी इस मंत्रालय में नज़र आएंगे या फिर कोई दूसरा नेता स्वास्थ्य  मंत्री के तौर पर शपथ लेगा.

 

शहरी विकास मंत्रालय

पीएम मोदी ने सरकार बनने के बाद वादा किया था कि साल 2022 तक देश के हर परिवार के पास अपना पक्का मकान होगा. इस सपने को पूरा करने के लिए वो प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत भी कर चुके हैं. उनका लक्ष्य है 2022 तक इस योजना को पूरा कर हर परिवार को अपना मकान उलपलब्ध कराना है. ऐसे में इस अहम मंत्रालय को लेकर भी लोगों के मन में सवाल है कि इस बार इसकी ज़िम्मेदारी किसको सौंपी जाएगी. पिछले कार्यकाल में इस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी जेपी नड्डा संभाल रहे थे. क्या एक बार फिर उन्हीं पर भरोसा जताया जाएगा या किसी और को इसकी ज़िम्मेदारी दी जाएगी.

 

वित्त मंत्रालय

देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली लंबे वक्त से बीमार हैं. यही वजह है कि कई बार इस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी पियूष गोयल के कंधों पर डाली गई. यहां तक की इस बार का बजट भी पीयूष गोयल ने ही पेश किया था. हाल में जेटली की सेहत को लेकर कई तरह की खबरें आईं हालांकि उन रिपोर्ट्स को सरकार ने खारिज कर दिया. जानकार भी मान रहे हैं कि इस बार अरुण जेटली वित्त मंत्री नहीं होंगे.

पहले कार्यकाल में इन योजनाओं को सही ढंग से लागू करने के लिए पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में तमाम मज़बूत नेताओं को शामिल किया था. ऐसे में जब एक बार फिर मोदी की सत्ता में वापसी हो गई है, तो सवालों और कयासों का दौर चल निकला है कि इस दफा मोदी मंत्रिमंडल में कौन से नेता किस ज़िम्मेदारी में नज़र आ आएंगे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में दर्जनों योजनाओं की शुरुआत की थी. गरीब महिलाओं को चूल्हे के धूएं से निजात दिलाने के लिए उज्जवला योजना शुरु की गई. पीएम मोदी की इस योजना को जानकार 2019 की जीत का बड़ा कारण मानते हैं. इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोदी ने 2022 तक हर बेघर परिवार को पक्का मकान देने का वादा किया.

 

स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में करोड़ों शौचालय का निर्माण किया गया. देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने के वादे को पूरा करने के लिए पीएम मोदी ने ‘सौभाग्य योजना’ लागू की. इसके अलावा मुद्रा योजना, जनधन योजना, कृषि बीमा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि योजना और डिजिटल इंडिया जैसी कई योजनाओं को पीएम मोदी ने अपनी जीत का सूत्रधार बनाया.

इन तमाम योजनाओं के अलावा विदेश नीति, आतंकवाद और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी पीएम मोदी ने चुनाव में वोट बटोरे. जानकारों के मुताबिक सरकार दूसरे कार्यकाल में भी इन योजनाओं और नीतियों का विस्तार करेगी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इनकी देख रेख और मज़बूती के साथ क्रियान्वयन के लिए पीएम मोदी किन नेताओं पर भरोसा जताएंगे.

इस वक्त मोदी के नए मंत्रिमंडल को लेकर अटकलें तेज़ हैं. माना जा रहा है कि सुषमा स्वराज और अरुण जेटली इस बार मंत्रिमंडल में नहीं होंगे. इसके अलावा भी कुछ और मंत्रालयों में नए मंत्री जी का चेहरा नज़र आने की उम्मीद है. कई नामों को लेकर अटलें तेज़ हैं, जिनमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हैं. नरेंद्र मोदी 30 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे, उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हीं के साथ मंत्रिमंडल में शामिल तमाम सांसद भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. ऐसे में मंत्रिमंडल का सही रूप 30 मई को सामने आने की उम्मीद है.

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