राहुल गाँधी को अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए मनाना हुआ मुश्किल, नहीं मान रहे अपनों की भी बात!

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लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में नेतृत्व का संकट उबर गया है. राहुल गांधी कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ने पर अड़ गए हैं, लेकिन पूरी पार्टी और उनका परिवार उन्हें मनाने में जुटा है. मंगलवार को घंटों तक उनके घर मैराथन बैठक भी हुई, राहुल गांधी माने लेकिन कुछ ही समय के लिए. राहुल ने अपने दल से कहा है कि जब तक नया अध्यक्ष नहीं मिलता है तबतक ही वह जिम्मेदारी संभालेंगे. अब खबर है कि राहुल गांधी अगले तीन-चार महीने तक पार्टी की कमान संभाल सकते हैं.

कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में मात्र 52 सीटों पर सिमट गई. राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की लेकिन पार्टी नहीं मानी. मंगलवार को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सचिन पायलट, अहमद पटेल, अशोक गहलोत समेत कई बड़े नेता राहुल को मनाने पहुंचे थे.

राहुल ने पार्टी के सामने रखी शर्त

इसी के बाद सामने आया कि राहुल ने पार्टी के सामने शर्त रखी है कि वह अध्यक्ष पद छोड़ने का मन बना चुके हैं, लेकिन जबतक पार्टी को विकल्प नहीं मिलता है तो वह जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं. पार्टी सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी अगले तीन-चार महीनों के लिए पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे.

इस दौरान राहुल गांधी को अगर पार्टी में कोई बड़ा बदलाव करना हो तो वह कर सकते हैं. जबतक उनका कोई विकल्प सामने ना आ पाए. प्रियंका गांधी से मिलकर आए एक पार्टी नेता ने बताया कि पार्टी को उम्मीद है कि राहुल अपना फैसला बदल सकते हैं, क्योंकि उनका विकल्प ढूंढना मुश्किल है.

यहां तक कि राहुल गांधी ने मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से भी मुलाकात नहीं की, वो भी सिर्फ प्रियंका गांधी से ही मिल पाए.

चुनाव के बाद से ही कांग्रेस में नेतृत्व का संकट पैदा हुआ है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार होने के बावजूद खराब प्रदर्शन से राहुल खासा नाराज थे. उन्होंने कई सीनियर लीडर पर ये कहकर निशाना साधा था कि कुछ नेताओं ने सिर्फ अपने बेटों को तवज्जो दी.

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