ये ऊँट किस करवट बैठेगा ? राफेल सौदे की कैग रिपोर्ट पलट सकती है सदन की सरकार !

No icon

विवादित राफेल सौदे को लेकर आज संसद में कैग की रिपोर्ट पेश किए जाने की संभावना है। लेकिन इस बीच नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) राजीव महर्षि को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में नई जंग छिड़ गई है। कांग्रेस ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए राजीव महर्षि से अनुरोध किया कि वह 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के करार की ऑडिट प्रक्रिया से खुद को अलग कर लें, क्योंकि तत्कालीन वित्त सचिव के तौर पर वह इस वार्ता का हिस्सा थे. वहीं केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने भी पलटवार किया है और कहा कि कांग्रेस झूठ के आधार पर संस्था पर इस तरह के आरोप लगा रही है।

वहीँ दूसरी तरफ एक के बाद एक कई ट्वीट करके जेटली ने कहा, संस्थानों को बर्बाद करने वालों द्वारा झूठ को आधार बनाकर कैग की संस्था पर एक और हमला । दस साल सरकार में रहने के बावजूद यूपीए सरकार के पूर्व मंत्रियों को अब तक नहीं पता कि वित्त सचिव महज एक पद है जो वित्त मंत्रालय के वरिष्ठतम सचिव को दिया जाता है। '

 

इससे पहले राफेल डील में कथित घोटाले की जांच संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विमान के सौदे की प्रक्रिया में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई. इसलिए मामले में जांच की जरूरत नहीं है. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में की गई एक टिप्पणी को लेकर खासा विवाद उठा था । जिसमें कहा गया था कि राफेल की प्रइस डिटेल कैग के साथ साझा की गई है और कैग की रिपोर्ट का एक हिस्सा संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष रखा गया और वह पब्लिक डोमेन में है ।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कैग रिपोर्ट को लेकर की गई इस टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि अदालत के निर्णय में जिस रिपोर्ट का जिक्र किया गया वो पीएसी में आई ही नहीं. कांग्रेस ने इस मामले में मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया. मामला बढ़ता देख सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कैग के संबंध में की गई टिप्पणी में सुधार के लिए अर्जी लगाई गई. जिसमें सरकार की तरफ से कहा गया कि उसकी तरफ से दिए गए सीलबंद नोट में कहा गया था कि सरकार कैग के साथ पहले ही प्राइस डिटेल साझा कर चुकी है .

संसद के बजट सत्र के अब आखिरी 3 दिन बचे हैं, ऐसे में राफेल सौदे से जुड़ी कैग रिपोर्ट सदन की सरकार पटल पर रख सकती है। अगर ये घोटाला हुआ तो मोदी सरकार की करप्शन मुक्त छवि पर गहरा असर डालेगा , और अगर नहीं तो बार फिर राहुल गाँधी केवल मजाक भर बनकर रह जायेंगे।

Comment As:

Comment (0)

-->